₹12 लाख वाला zero-tax गणित, freelancer-edition
₹12 लाख तक salary tax-free है, यह सबको पता है। कम लोग जानते हैं कि वही rebate presumptive taxation से मिलकर क्या करती है — business-track वाला freelancer ₹12 लाख से कहीं ज़्यादा bill करके भी शून्य पर रह सकता है।
Budget 2025 की जो headline सबको याद है: नई regime में ₹12 लाख तक income tax नहीं — ₹60,000 की rebate (अब 2025-Act की s.156) slab-tax पोंछ देती है। जो बात ज़्यादातर coverage से छूटती है: यही rebate जब Section 58 की presumptive taxation से मिलती है तो क्या होता है।
तरकीब: tax presumed आमदनी पर लगता है, receipts पर नहीं
Presumptive में tax आपके bank में आए पैसे पर नहीं, receipts के एक तय प्रतिशत पर लगता है:
- Business-रास्ता (writer, designer, editor, marketer — ज़्यादातर freelancers): deemed आमदनी = digital receipts का 6%।
- Profession-रास्ता (s.62(4) की सूची — IT, legal, medical…): deemed आमदनी = receipts का 50%।
Rebate उसी deemed आमदनी को देखती है। तो असली billing में zero-tax की छत:
| रास्ता | Zero-tax billing की छत | क्यों |
|---|---|---|
| Business (6%) | ₹2 करोड़ तक | ₹2cr का 6% = ₹12L — ठीक rebate-रेखा; और ₹2cr इस रास्ते की सीमा भी है |
| Profession (50%) | ₹24 लाख तक | ₹24L का 50% = ₹12L |
| Salary | ₹12 लाख + ₹75k standard deduction | वही केस जो सब जानते हैं |
पहली पंक्ति आपने सही पढ़ी: पूरी-digital business-track freelancer ₹2 करोड़ bill करके presumed आमदनी पर शून्य income tax दे सकता है। यह कोई चोर-दरवाज़ा नहीं — s.58 और s.156 को साथ पढ़ने पर यही design निकलता है। अपने अंक चलाइए।
बारीक़ अक्षर, जो इसे ईमानदार रखते हैं
- Floor-नियम: असली profit 6%/50% से ऊँचा हो तो s.58 ऊँचा वाला ही घोषित करने को कहता है। Zero-tax गणित floor घोषित करने पर टिका है।
- दूसरी आमदनी जादू तोड़ देती है — salary, ब्याज या capital gains ऊपर चढ़कर ₹12L पार करा सकते हैं।
- Special-rate आमदनी बाहर है: special दर वाले STCG/LTCG को rebate नहीं मिलती, और वे ₹12L-जाँच में गिनते भी नहीं।
- Marginal relief ₹12L के ठीक ऊपर की धार कुंद करती है — ₹12.1L कमाकर आप ₹12L वाले से पीछे कभी नहीं रहते।
- GST अलग है: शून्य income tax का GST-registration या LUT से कोई रिश्ता नहीं — वह अपना अलग सवाल है।
एक मिनट की जाँच
पहले अपना रास्ता पक्का कीजिए — 6%-बनाम-50% का सवाल ऊपर का सब कुछ तय करता है। फिर receipts calculator में डालिए और दोनों regime आमने-सामने देखिए।
Last verified: 18 सितंबर 2026 — सलाह नहीं है — फ़ैसले Chartered Accountant से पक्के कीजिए।